जामुड़िया के जबा आठपाड़ा आदिवासी संथाल यात्रा समिति की अभिनव पहल, रात के बजाय दिन में होगी संथाली यात्रा
जीशू हेमब्रम –: जामुड़िया प्रखंड के जबा आठपाड़ा आदिवासी संथाल यात्रा समिति ने एक अभिनव और प्रशंसनीय पहल करते हुए इस वर्ष रात में नहीं, बल्कि दिन के उजाले में संथाली यात्रा का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इस फैसले को लेकर आदिवासी समाज में व्यापक चर्चा हो रही है।
समिति के आयोजकों का कहना है कि अब तक पूरी रात चलने वाली यात्रा के नाम पर कई दर्शक असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हो जाते थे। यात्रा मंच से लगभग 200 मीटर के दायरे में शराब की महफिलें जमने लगती थीं, जिससे आदिवासी संथाल समाज के सामाजिक और सांस्कृतिक माहौल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा था। इसी स्थिति से बाहर निकलने के लिए समिति ने यह साहसिक निर्णय लिया है।
जबा आठपाड़ा यात्रा समिति के सदस्यों ने बताया कि, “हम वर्ष 1985 से हर साल पूरी रात संथाली यात्रा का आयोजन करते आ रहे हैं, जिससे हमें आर्थिक लाभ भी होता था। लेकिन इस बार लाभ की परवाह किए बिना, आदिवासी संथाल समाज के हित में हमने दिन में यात्रा आयोजित करने का फैसला किया है। इस वर्ष प्रस्तुत की जाने वाली संथाली यात्रा का नाम है — ‘अकय खातिर जियोई लः कान’ ‘आंचार दानांग रे मेत दाः जरः कान’। यह यात्रा 25/01/2026 को आयोजित होगी। भले ही हमें आर्थिक नुकसान हो, लेकिन हम अपने इस निर्णय पर अडिग हैं।”
समिति के सचिव गोरमेंट हांसदा ने बताया कि इस पहल से युवाओं को असामाजिक गतिविधियों से दूर रखा जा सकेगा और पारिवारिक माहौल में सभी आयु वर्ग के लोग निःसंकोच संथाली यात्रा का आनंद ले सकेंगे। इससे आदिवासी संथाल समाज की संस्कृति और परंपरा और अधिक सुदृढ़ होगी।
इसके साथ ही जबा आठपाड़ा आदिवासी संथाल यात्रा समिति ने जिले और राज्य की अन्य आदिवासी संथाल यात्रा समितियों से भी अपील की है कि वे भी इस पहल का अनुसरण करते हुए दिन के उजाले में संथाली यात्रा का आयोजन करें।
आदिवासी समाज के प्रबुद्ध लोगों का मानना है कि यह निर्णय समाज के समग्र कल्याण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
Reviewed by Social Tribal News Journalist
on
January 05, 2026
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