कांकसा -: अब बस दो दिन बाद ही बंगला कैलेंडर का 25 पौष। इसके बाद आदिवासी संथाल जनजाति का सबसे बड़ा पर्व सहराय उत्सव (बंधना पर्व) मनाया जाएगा। इस पर्व को लेकर अभी से ही आदिवासी बहुल गांवों में उत्सव का माहौल देखने को मिल रहा है।
ऐसा ही एक मनमोहक दृश्य कांकसा थाना क्षेत्र के शुसुनडोबा आदिवासी गांव में देखने को मिला। सहराय उत्सव के स्वागत में गांव के मिट्टी के घरों की दीवारों पर रंग-बिरंगी और आकर्षक चित्रकारी की गई है। इन दीवार चित्रों में आदिवासी संस्कृति, प्रकृति और ग्रामीण जीवन के विभिन्न पहलुओं को खूबसूरती से उकेरा गया है।
खास बात यह है कि इन कला कृतियों के सर्जक गांव के ही आदिवासी युवक और युवतियां हैं। अपनी सृजनात्मकता और पारंपरिक कला-बोध के जरिए उन्होंने मिट्टी की दीवारों को एक-एक कला कैनवास में बदल दिया है। रंगों के प्रयोग और डिज़ाइनों की विविधता ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
आदिवासी युवा पीढ़ी की इस पहल से स्थानीय निवासी बेहद खुश और गर्व महसूस कर रहे हैं। केवल आदिवासी समाज ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के अन्य समुदायों के लोग भी इन दीवार चित्रों की जमकर सराहना कर रहे हैं।
सहराय उत्सव को लेकर आदिवासी समाज की यह कलात्मक और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति ग्रामीण परंपरा और विरासत के संरक्षण का एक अनूठा उदाहरण बनकर उभरी है।
Reviewed by Social Tribal News Journalist
on
January 08, 2026
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